Test Ghsot expert
विला में एक स्विमिंग पूल था, उसके बाजू में ही डॉयनिंग टेबल, फ़र्श सफ़ेद मार्बल का। एक ओर दीवार के साथ पेड़-पौधे लगे हुए थे। कुल मिलाकर ऐसा फ़ील आ रहा था कि मानो फ़्लॉरिडा (Florida) जैसी जगह पर किसी समग्गलर के बंगले में आ गए हों (अब थोड़ी पुरानी हॉलीवुड की फिल्मों में उन बंगलों को ऐसे ही दिखाया जाता था)।
विला के ३ बेडरूम में से एक मैंने पकड़ लिया बाकी दोनो दास और शेवानी
परिवार ने। लोकल समय के अनुसार दोपहर के कोई तीन बज चुके थे। तो अपने विला
में ही लंच मंगवा लिया गया और टुन्न तो सभी वैसे ही हो रहे थे (थकान से
भई), इसलिए सांयकाल मिलने का वायदा कर सभी अपने-२ कमरों में चले गए और अपन
आकर (और अलार्म लगा कर) सो गए।
सांयकाल थोड़ा देर से उठना हुआ, तैयार होकर सभी निकल पड़े कि पैदल ही थोड़ा आसपास देखा जाए और फिर रात्रि भोज का बंदोबस्त किया जाए। एक रेस्तरां का विनायक ने पता किया कि वह बहुत शानदार है लेकिन वह बंद हो रहा था, रात्रि के दस बजे ही। ऐसा लगा कि बाली न आकर हम हरिद्वार-ऋषिकेश आ गए हैं जहाँ सब लोग रात्रि नौ-दस बजे सो जाते हैं क्योंकि सुबह ब्राह्म मुहूर्त में उठ कर पूजा-अर्चना करनी होती है।
बहरहाल, हम एक दूसरे रेस्तरां में पहुँचे, वह भी खाली था लेकिन पूछने पर
पता चला कि अभी बंद नहीं हो रहा है। वहाँ खाना अच्छा था, खाने से अच्छा
रेस्तरां का माहौल था।
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विला में एक स्विमिंग पूल था, उसके बाजू में ही डॉयनिंग टेबल, फ़र्श सफ़ेद मार्बल का। एक ओर दीवार के साथ पेड़-पौधे लगे हुए थे। कुल मिलाकर ऐसा फ़ील आ रहा था कि मानो फ़्लॉरिडा (Florida) जैसी जगह पर किसी समग्गलर के बंगले में आ गए हों (अब थोड़ी पुरानी हॉलीवुड की फिल्मों में उन बंगलों को ऐसे ही दिखाया जाता था)।
विला के ३ बेडरूम में से एक मैंने पकड़ लिया बाकी दोनो दास और शेवानी परिवार ने। लोकल समय के अनुसार दोपहर के कोई तीन बज चुके थे। तो अपने विला में ही लंच मंगवा लिया गया और टुन्न तो सभी वैसे ही हो रहे थे (थकान से भई), इसलिए सांयकाल मिलने का वायदा कर सभी अपने-२ कमरों में चले गए और अपन आकर (और अलार्म लगा कर) सो गए।
सांयकाल थोड़ा देर से उठना हुआ, तैयार होकर सभी निकल पड़े कि पैदल ही थोड़ा आसपास देखा जाए और फिर रात्रि भोज का बंदोबस्त किया जाए। एक रेस्तरां का विनायक ने पता किया कि वह बहुत शानदार है लेकिन वह बंद हो रहा था, रात्रि के दस बजे ही। ऐसा लगा कि बाली न आकर हम हरिद्वार-ऋषिकेश आ गए हैं जहाँ सब लोग रात्रि नौ-दस बजे सो जाते हैं क्योंकि सुबह ब्राह्म मुहूर्त में उठ कर पूजा-अर्चना करनी होती है।
बहरहाल, हम एक दूसरे रेस्तरां में पहुँचे, वह भी खाली था लेकिन पूछने पर पता चला कि अभी बंद नहीं हो रहा है। वहाँ खाना अच्छा था, खाने से अच्छा रेस्तरां का माहौल था।
विला में एक स्विमिंग पूल था, उसके बाजू में ही डॉयनिंग टेबल, फ़र्श सफ़ेद मार्बल का। एक ओर दीवार के साथ पेड़-पौधे लगे हुए थे। कुल मिलाकर ऐसा फ़ील आ रहा था कि मानो फ़्लॉरिडा (Florida) जैसी जगह पर किसी समग्गलर के बंगले में आ गए हों (अब थोड़ी पुरानी हॉलीवुड की फिल्मों में उन बंगलों को ऐसे ही दिखाया जाता था)।
सांयकाल थोड़ा देर से उठना हुआ, तैयार होकर सभी निकल पड़े कि पैदल ही थोड़ा आसपास देखा जाए और फिर रात्रि भोज का बंदोबस्त किया जाए। एक रेस्तरां का विनायक ने पता किया कि वह बहुत शानदार है लेकिन वह बंद हो रहा था, रात्रि के दस बजे ही। ऐसा लगा कि बाली न आकर हम हरिद्वार-ऋषिकेश आ गए हैं जहाँ सब लोग रात्रि नौ-दस बजे सो जाते हैं क्योंकि सुबह ब्राह्म मुहूर्त में उठ कर पूजा-अर्चना करनी होती है।
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विला में एक स्विमिंग पूल था, उसके बाजू में ही डॉयनिंग टेबल, फ़र्श सफ़ेद मार्बल का। एक ओर दीवार के साथ पेड़-पौधे लगे हुए थे। कुल मिलाकर ऐसा फ़ील आ रहा था कि मानो फ़्लॉरिडा (Florida) जैसी जगह पर किसी समग्गलर के बंगले में आ गए हों (अब थोड़ी पुरानी हॉलीवुड की फिल्मों में उन बंगलों को ऐसे ही दिखाया जाता था)।
सांयकाल थोड़ा देर से उठना हुआ, तैयार होकर सभी निकल पड़े कि पैदल ही थोड़ा आसपास देखा जाए और फिर रात्रि भोज का बंदोबस्त किया जाए। एक रेस्तरां का विनायक ने पता किया कि वह बहुत शानदार है लेकिन वह बंद हो रहा था, रात्रि के दस बजे ही। ऐसा लगा कि बाली न आकर हम हरिद्वार-ऋषिकेश आ गए हैं जहाँ सब लोग रात्रि नौ-दस बजे सो जाते हैं क्योंकि सुबह ब्राह्म मुहूर्त में उठ कर पूजा-अर्चना करनी होती है।




